मंगलवार 6 अक्टूबर 2026 - 16:22
जीवनसाथी अपनी मेहनत बार-बार क्यों याद दिलाता है? एक महत्वपूर्ण बात

इस्लामी परामर्श विशेषज्ञ हुज्जतुल इस्लाम रज़ा यूसुफ़ज़ादेह ने कहा है कि यदि पति या पत्नी घर-परिवार के लिए अपनी मेहनत और सेवाओं का बार-बार उल्लेख करें, तो यह जरूरी नहीं कि वे एहसान जता रहे हों। कई बार इसके पीछे केवल यह इच्छा होती है कि उनकी मेहनत को देखा जाए, उसकी सराहना की जाए और उन्हें अपनी अहमियत का एहसास हो।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामी परामर्श विशेषज्ञ हुज्जतुल इस्लाम रज़ा यूसुफ़ज़ादेह ने कहा कि यदि पति या पत्नी घर-परिवार के लिए किए गए अपने कामों और सेवाओं का बार-बार उल्लेख करें, तो जरूरी नहीं कि इसका उद्देश्य एहसान जताना हो। कई बार व्यक्ति केवल यह चाहता है कि उसकी मेहनत को समझा और सराहा जाए।

हुज्जतुल इस्लाम यूसुफ़ज़ादेह ने “पर्समान-ए-तरबियती” कार्यक्रम में बातचीत करते हुए कहा कि जीवनसाथी की किसी एक बात के आधार पर उसके बारे में फैसला नहीं करना चाहिए। किसी व्यक्ति के व्यवहार को समझने के लिए उसकी समग्र आदतों, परिस्थितियों और बात कहने के तरीके को देखना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग घर की जिम्मेदारियां पूरी करते हैं और अपने जीवनसाथी तथा बच्चों के लिए बहुत कुछ करते हैं। लेकिन जब उन्हें महसूस होता है कि उनकी मेहनत की कद्र नहीं हो रही है, तो वे अपने किए हुए कामों का उल्लेख करना शुरू कर देते हैं। देखने में उनकी बात शिकायत या एहसान जताने जैसी लग सकती है, लेकिन अंदर से वे शायद केवल यह चाहते हैं कि कोई उनसे कहे, “हम आपकी मेहनत से परिचित हैं और उसकी कद्र करते हैं।”

परामर्श विशेषज्ञ ने कहा कि पति-पत्नी के बीच कई समस्याएं उस समय पैदा होती हैं, जब दोनों एक-दूसरे की बात के पीछे छिपी वास्तविक भावना को समझने के बजाय केवल शब्दों पर प्रतिक्रिया देते हैं। यदि पति अपनी मेहनत का उल्लेख करे और पत्नी तुरंत नाराज़ हो जाए, या पत्नी अपनी कुर्बानियों का जिक्र करे और पति उसे ताना समझे, तो मामूली मतभेद भी दिल दुखाने वाली स्थिति में बदल सकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवनसाथी की अच्छी बातों और उसकी जिम्मेदारियों को स्वयं महसूस करते हुए उसकी सराहना करनी चाहिए। घर संभालना, बच्चों की देखभाल करना, आर्थिक जिम्मेदारियां पूरी करना या दूसरे के आराम का ध्यान रखना जैसे काम मामूली नहीं होते। जब व्यक्ति को समय पर प्रेम और सराहना मिलती रहती है, तो उसे अपनी मेहनत बार-बार याद दिलाने की जरूरत कम महसूस होती है।

हुज्जतुल इस्लाम यूसुफ़ज़ादेह ने कहा कि हर बात को नकारात्मक नजरिए से देखने के बजाय यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि सामने वाला वास्तव में क्या चाहता है। संभव है कि उसकी शिकायत के पीछे गुस्सा नहीं, बल्कि ध्यान और अपनापन पाने की जरूरत हो। इसी तरह अपनी मेहनत का बार-बार उल्लेख करने के पीछे एहसान जताना नहीं, बल्कि प्रेम, ध्यान और सराहना की इच्छा हो सकती है।

उन्होंने कहा कि खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए केवल एक-दूसरे की गलतियों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक-दूसरे की मेहनत को समय रहते महसूस करना और उसकी सराहना करना भी जरूरी है।

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